Wednesday, October 22, 2008

pyaar

कौन कहता है की प्यार पुरा होता है
प्यार का तो पहला शब्द ही अधुरा होता है
ये तो अपने आप में ही अजूबा होता है
अजीब सा दर्द दिल में होता है
वक्त खुमारी में ही बसर होता है
नज़र आता है चाँद में उसका ही चेहरा
नींद का न कोई दिमाग पर असर होता है
जगता हू रात रात भर करवटे बदल बदल
फिर भी न जाने कैसे सपनो में भी उसका दखल होता है

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