कौन कहता है की प्यार पुरा होता है
प्यार का तो पहला शब्द ही अधुरा होता है
ये तो अपने आप में ही अजूबा होता है
अजीब सा दर्द दिल में होता है
वक्त खुमारी में ही बसर होता है
नज़र आता है चाँद में उसका ही चेहरा
नींद का न कोई दिमाग पर असर होता है
जगता हू रात रात भर करवटे बदल बदल
फिर भी न जाने कैसे सपनो में भी उसका दखल होता है
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment