जीवन के इस सफर में सोचा मेने देखू वापस मुडके
क्या पाया क्या खो दिया इस भाग दौड़ में
पाया मेने धन आपार पर में हो गया बीमार
बनाये मेने बंगला और कार पर छुट गया अपनों का प्यार
जीती मेने बहुत कुछ पर न पा सका सच्चा सूख
बने तो दोस्त बहुत मेरे पर साथी कोई बन न सका
paney को तो बहुत पाया पर खो दिया अपना जीवन साथी
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