Tuesday, September 23, 2008

दीपक

जलता है सीने में आग लिए सारी रात जो
अधेरे से लड़ता है रोशिनी के लिए वो
दीपक है वो दीपक ही तो है वो

जाने कितनी उम्मीदों को उसने बनते देखा
फिर कितनी ही उम्मीदों का बिखरना भी देखा
उम्मीदों के बनने बिगड़ने का गवाह है जो
दीपक है वो दीपक ही तो है वो

जाने कितने हीर रान्झो के मिलन का साक्षी वो बना
और जाने कितने ही लैला मजनू का बीछडना भी सहा
मिलन और जुदाई का गवाह है जो
दीपक है वो दीपक ही तो है वो

जलता है वो इंसान के जग में आने पर भी
जलता है वो इंसान के जग से जाने पर भी
इंसान के जीवन मरण का साथी है जो
दीपक है वो दीपक ही तो है वो

किसी ने जलाया उसे खुबसूरत भगवान् के लिए
किसी ने जलाया उसे साधारण इंसान के लिए
किसी ने जलाया उसे कुरूप सैतान के लिए
हर किसी के लिए जलता है जो
दीपक है वो दीपक ही तो है वो



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